Spiritual Article त्याग में पूर्व भवों के संस्कार काम करते हैं

Spiritual Article by आचार्यदेव श्रीमद विजय रामचंद्रसूरीश्वर जी महाराजा 
संपूर्ण मनुष्य भव , वस्तुतः धर्म का मौसम है । संपूर्ण मनुष्य भव , धर्म के लिये ही निर्मित हुआ है । मनुष्य भव , भोगसुख – रागरंग – मौजमस्ती के लिये है ही नहीं । नारकी दुःख – दावानल से संतप्त हैं , तिर्यंच विवेक – विकल हैं और देवता विषयों में प्रसक्त हैं : तब मनुष्यों को ही एक धर्म – सामग्री की प्राप्ति हुई है और इसी कारण शास्त्रों में मनुष्य भव की दुर्लभता का वर्णन किया गया है । Spiritual Article
जो लोग मनुष्य भव को केवल भोगजीवन बना देते हैं , वे इस दुर्लभ मनुष्य भव का मूल्य ही नहीं समझ पाये हैं , ऐसा कहें तो अनुचित नहीं होगा । धर्म की सामग्री विशिष्ट प्रकार की होने के कारण ही मनुष्य भव की महत्ता है । ऐसे महत्त्वपूर्ण मनुष्य भव को प्राप्त किया , यह परम पुण्योदय है , परंतु इसकी सफलता किसमें है ? मौजमस्ती करने में ? विषयविलास और दुनिया के रागरंग में लीन होने में ? कदापि नहीं , ऐसा करने वालों के लिये तो ये भव भयंकर है : क्योंकि  “जो मनुष्य भव मुक्ति की तरफ़ ले जाये , वही मनुष्य भव सातवें नर्क में भी ले जाता है ।”
ज्ञानियों ने मनुष्य भव की प्रशंसा की है , इसका कारण एक मात्र यही है कि मनुष्य भव धर्म की साधना में परम उपयोगी है : इसके बावजूद समस्त जीव धर्म की साधना में आजीवन रत रहें , ऐसा होता नहीं है , परंतु ऐसी आत्माएँ भी श्री जिनेश्वर देवों के शासन में हो चुकी हैं , जिन्होंने अपनी करोड़ों पूर्व की आयु में से मात्र आठ ही वर्ष छोड़ कर आजीवन सर्वविरति की आराधना में गुजार कर अपना आत्म कल्याण सिद्ध कर लिया । यह वास्तविकता होने के बावजूद कुछ अज्ञानी आत्माओं के मन में प्रश्न उठता है कि – करोड़ों पूर्व की आयु के समय आठ वर्ष का बालक क्या जाने ?

Spiritual Article : कोई अमीर तो कोई गरीब 

जो पूर्व भव के संस्कारों को नहीं मानता है , उसी के मन में ऐसा प्रश्न उठता है : अर्थात् जो परलोक को नहीं मानता है , उसी के मन में यह प्रश्न उठता है : परंतु जो परलोक में मानते हैं , उनके मन में ऐसे प्रश्न नहीं उठते हैं : कोई पूछे कि “ एक जीव शेठ के यहाँ क्यों जन्मा ? और दूसरा जीव सामान्य व्यक्ति के यहाँ क्यों जन्मा ? एक ग़रीब के यहाँ जन्मा और दूसरा सीधा सुनार के यहाँ क्यों पैदा हुआ ? यह सब क्यों होता है ? आकस्मिक रूप से होता है , ऐसा समझते हैं आप ?
कुछ लोग मेहनत कर – करके मर जाएँ , तो भी खाने भर को भी नहीं मिलता है और आपको समय पर गरमागरम भोजन मिलता है , इसका कारण क्या है ? ‘ कोई पूछे कि ‘ एक माता की कोख से दो बालक एक साथ पैदा होते हैं , उनमें से एक विद्वान बनता है और एक मूर्ख रह जाता है , इसका कारण क्या ? माता – पिता एक , पढ़ाने वाले शिक्षक भी एक और दोनों के संयोग भी एक समान , फिर भी एक बुद्धिमान होता है और दूसरा बुद्धू ही रहता है , इसका कारण क्या ? ‘
जो आत्माएँ परलोक को नहीं मानती हैं , जो आत्माएँ पूर्व की कार्यवाही को नहीं मानती हैं , उन्हें तो इन सभी के जवाब में मौन ही हो जाना पड़ता है । एक व्यभिचारी और एक सदाचारी : कुछ लोग ऐसे हैं कि कैसे भी भयंकर प्रसंग में भी उन्हें हानि नहीं होती है , हज़ारों स्त्रियाँ हों , फिर भी आँख उठा कर नहीं देखते हैं और कुछ लोगों की दृष्टि प्रति पल भटकती रहती है – इसका कारण क्या ? छोटी उम्र में भी कुछ ऐसे उठाईगीर बन जाते हैं कि उनके आगे पघड़ी वाले भी पानी भरें ? क्यों ? पूर्व के संस्कार ही माने जाते हैं । वहाँ ऐसा नहीं पूछा जाता है कि ‘ क्या जानें ! ‘
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