Motivational Article विश्वास ही आश्वास है – प्रदीप कोठारी

Motivational Article :  विश्वास संसार का महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। इसके सहारे व्यक्ति जीवन जीता है, विश्वास के पथ पर बढ़ता है। परन्तु वर्तमान वैज्ञानिक युग में विश्वास की बजाय अंधविश्वास पर लोगों की आस्था ज्यादा है। व्यक्त्ति जब मुसीबत में होता है, मृत्यु सामने नजर आती है तब उसका आकर्षण उन मुसीबतों पर विजय पाने के लिए विश्वास पर होना चाहिए, पर होता अंधविश्वास पर। यहां तक कि जो व्यक्तित्व वर्तमान पीढ़ी के लिए आदर्श बने हुए हैं वे भी इस अंधनिश्वारा की दुनिया से अछूते नहीं हैं।
चाहे वे उद्योगिक घराने के हो या राजनीतिक गलियारे में प्रतिष्ठा पाने वाले। चाहे खेलों में सफल होने वाले हो या फिल्मों में अपने अभिनय की धाक जमाने वाले, सभी अंधविश्वास को मानने में आगे हैं। एक समय था जब संचार के साधन कम थे। आज उनकी बहुलता है, शिक्षा का स्तर सुधरा है, फिर भी अंधविश्वास के कारण व्यक्ति समाज को गुमराह करने वाली अंधरूढ़ियों को समझ नहीं पाया है, छोड़ नहीं पाया है।
हम प्रायः समावार पत्रों में पढ़ते हैं कि अमुक जगह बलि चढ़ाई गई। अनेक धार्मिक त्योहार भी आते है जिन पर बलि अनिवार्य होती है पर मेरी समझ में यह नहीं आता कि किसी जीव को मृत्यु शय्या पर सुलाकर किसी देवी – देवता या भगवान को कैसे प्रसन्न किया जा सकता है? किसी धर्म को कैसे निभाया जा सकता है? हर धर्म में भाईचारे व अहिंसा के पालन पर जोर दिया जाता है। बलि चढ़ाना हिंसा है। चाहे बलि जानवर की हो या मानव की। फिर अहिंसा का पालन कैसे हो सकता है? भाईचारे की भावना कैसे विकसित हो सकती है? वर्तमान का युवा शिक्षित है, वह सब जानता है परन्तु अंधविश्वांस की बेड़ियों में जकड़ा कुछ नहीं कर पाता और स्वयं भी इन अंधरूढ़ियों में भाग लेने लग जाता है।

धर्मगुरु की प्रेरक पंक्तियाँ 

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धर्म के नाम पर इस तरह का जो अंधविश्वास पलता है वह आत्मा का उत्थान नहीं कर सकता बल्कि दुर्गति में ही धकेलता है। विश्वारा ही आत्मा को आत्मा तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होता है।
नया मोड़ हो उसी दिशा में, नयी चेतना फिर जागे,
तोड़ गिराएं जीर्ण शीर्ण, जो अंधरूढ़ियों के धागे।
आगे बढ़ने का यह युग है, बढ़ना हमको सबसे प्यारा ।।
आचार्यश्री तुलसी के गीत की ये पंक्तियां भी यही मार्गदर्शन कर रही है कि यह युग ( जो 21 वीं सदी का चल रहा है ) आगे बढ़ने का युग है। आगे बढ़ने के लिए अंधरुढ़ियों को समाप्त करना होगा। विश्वास को अपनाना होगा, तभी चमत्कार घटित होगा और सही मायने में आत्मोत्थान की तरफ हम सब आगे बढ़ पाएंगे।
निष्कर्ष यही निकलता है कि विश्वास हमें अपने मुख्य लक्ष्य को प्राप्त करने में मार्गदर्शक का कार्य करता है। हम सब का मूल लक्ष्य आत्मा को जानना, आत्मा तक पहुंचना है। हम आत्मा तक पहुंच जाएं तो परमात्मा को स्वतः प्राप्त कर लेंगे।
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Motivational Article by Pradeep Kothari 
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