Most powerful article सन्तान के रुप में कौन आता है जीवन में
जैन धर्म में कर्मवाद का सिद्धांत बहुत गहरा और सूक्ष्मता समझाया गया है. कर्मवाद में कर्मों के आधार पर सुख दुःख, लाभ हानि, निंदा प्रशंसा, मान अपमान मिलने की बात की गई है. वैसे ही रिश्ते नाते भी कर्मों के आधार पर जुड़ते हैं. पूर्व जन्मों के कर्मों से ही हमें इस जन्म में माता – पिता , भाई – बहन , पति – पत्नि , प्रेमी – प्रेमिका , मित्र – शत्रु , सगे – सम्बन्धी इत्यादि संसार के जितने भी रिश्ते नाते हैं , सब मिलते हैं । क्योंकि इन सबको हमें या तो कुछ देना होता है या इनसे कुछ लेना होता है । Aaj ka most powerful article
- वेसे ही सन्तान के रुप में हमारा कोई पूर्वजन्म का ‘सम्बन्धी’ ही आकर जन्म लेता है । जिसे शास्त्रों में चार प्रकार से बताया गया है .
ऋणानुबन्ध
पूर्व जन्म का कोई ऐसा जीव जिससे आपने ऋण लिया हो या उसका किसी भी प्रकार से धन नष्ट किया हो , वह आपके घर में सन्तान बनकर जन्म लेगा और आपका धन बीमारी में या व्यर्थ के कार्यों में तब तक नष्ट करेगा , जब तक उसका हिसाब पूरा ना हो जाये ।
शत्रु पुत्र
पूर्व जन्म का कोई दुश्मन आपसे बदला लेने के लिये आपके घर में सन्तान बनकर आयेगा और बड़ा होने पर माता – पिता से मारपीट , झगड़ा या उन्हें सारी जिन्दगी किसी भी प्रकार से सताता ही रहेगा । हमेशा कड़वा बोलकर उनकी बेइज्जती करेगा व उन्हें दुःखी रखकर खुश होगा ।
उदासीन पुत्र
इस प्रकार की सन्तान ना तो माता – पिता की सेवा करती है और ना ही कोई सुख देती है । बस , उनको उनके हाल पर मरने के लिए छोड़ देती है । विवाह होने पर यह माता – पिता से अलग हो जाते हैं ।
सेवक पुत्र
पूर्व जन्म में यदि आपने किसी की खूब सेवा की है तो वह अपनी की हुई सेवा का ऋण उतारने के लिए आपका पुत्र या पुत्री बनकर आता है और आपकी सेवा करता है । जो बोया है , वही तो काटोगे । अपने माँ – बाप की सेवा की है तो ही आपकी औलाद बुढ़ापे में आपकी सेवा करेगी , वर्ना कोई पानी पिलाने वाला भी पास नहीं होगा । Most powerful article

समझो वो व्यर्थ ही कमाया

