Khatu Shyam Dham से कोई खाली हाथ नही लौटता

जय श्री श्याम । आज मैं आपको इस ब्लॉग में मेरी Khatu Shyam Dham  की यात्रा के बारे में बताऊंगा ।

तो भक्तों मेरी यात्रा शुरू होती है हरियाणा से । मेरी ये यात्रा दो दिन की थी। हरियाणा से मैं और मेरे साथ लगभग 500 श्याम भक्त और थे। जो पांच बस बुक करके खाटू धाम गए। मैं पहली बार खाटू जी गया था। लेकिन अपने शहर के श्याम मंदिर में जाता रहता हूँ।

हम पहले दिन हरियाणा से सीकर व सीकर से रीगंस गए। वहां हम हरियाणा की ही धर्मशाला में रूके थे। रीगंस जाते ही हमने सबसे पहले बाबा श्याम के दर्शन किए। दर्शन के बाद ही खाना खाया था। खाना खाने के बाद सभी अगले दिन की तैयारी में लग गए थे। क्योंकि अगले दिन हमें रीगंस से खाटू जी निशान लेकर जाना था। सभी तैयारी होने के बाद बाबा श्याम का कीर्तन हुआ और सभी निशान की पूजा हुई। ये सब रात 12 बजे तक हुआ। उसके बाद सब ने खाना खाया। और कुछ देर के लिए आराम किया।

अगले दिन सुबह के 4 बजे तक सब लोग नाहा कर तैयार हो गए। ब्रह्म मूर्हत में ही श्याम निशान कि पुजा और श्याम बाबा का कीर्तन किया। फिर सभी लौगो ने निशान उठाए और रीगंस के बाबा श्याम के दर्शन और आरती करके सवा पांच बजे के आस – पास रीगंस से रवाना हो गये थे।

रोमांचकारी यात्रा : खाटू श्याम धाम [ Khatu Shyam Dham ]

Khatu Shyam Dham

उस समय फरवरी का महिना था और राजस्थान की ठंड और ठंडी – ठंडी राजस्थान की बालू रेत। क्योंकि मैं पहली बार खाटू जी जा रहा था। और वो भी रीगंस से बाबा श्याम का निशान हाथ मे लेकर। हम पुरे रास्ते झुमते गाते बाबा श्याम का गुण-गान करते – करते सुबह के 10 बजे रीगंस से खाटू जी पहुंच गए थे। फिर हमने खाटू जी के दर्शन किए। और दर्शन करने के बाद ही खाना खाया।

दोस्तों आप लोगों से ही प्रर्थना हैं कि अगर आप खाटू जी नही गए हैं तो एक बार आप खाटू जी सच्चे मन से अवश्य जाए। खाटू श्याम सभी भक्तों की मनोकामना पुरी अवश्य करते हैं। किसी भी भक्त को खाली हाथ वापिस नही भेजते।

मैं खाटू श्याम पर दिल से कुछ कहना चाहुगा।

 

माँ को दिया एक वचन
आज भी पूरा कर रहा बाबा खाटू श्याम
नही लौटाता, किसी भी हारे को खाली हाथ
जो भी जाता खाटू धाम
ऐसा है मेरा बाबा खाटू श्याम

 तो चलिए देखते हैं क्यों खाटू श्याम किसी भी भक्त को खाली हाथ नही भेजते।

Khatu Shyam Dham का प्राचीन इतिहास 

वैसे तो पूरे विश्व में बाबा श्याम के हजारों मंदिर है। लेकिन राजस्थान में शेखावाटी क्षेत्र के सीकर जिले में खाटू नामक जगह पर खाटूश्यामजी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। खाटू श्याम मंदिर में भीम के पौत्र और घटोंत्कच के पुत्र बर्बरीक की पूजा केवल शीश रूप में होती है। यह शीश खाटू में ही प्रकट हुआ था जो स्थान आज श्याम कुंड के नाम से जाना जाता है।

ऐसा माना जाता है जो भक्त सच्चे मन से श्याम कुंड में डुबकी लगा लेते है उनकी सभी बीमारियां समाप्त हो जाती है।

राजस्थान के सीकर जिले से संबध खाटू में श्याम के शीश की पूजा की जाती है। वही निकट स्थित रीगंस में उनके धड़ स्वरूप की पूजा की जाती है।

पौराणिक कथा 

खाटू श्याम का संबंध महाभारत काल से है। खाटू श्याम का नाम बर्बरीक था। जो पाडुंपुत्र भीम के पौत्र थे। जिनके पिता का नाम घटोत्कच व माता का नाम मोरवी था। जिसके कारण इन्हें मोरवीनंदन भी कहा जाता है।

बर्बरीक माता देवी के भक्त थे। देवी के वरदान से इन्हें तीन दिव्य बाण प्राप्त हुए थे। जो अपने लक्ष्य को भेंद कर वापिस लौट कर आ जाते थे।

महाभारत के युद्ध के समय बर्बरीक युद्ध में हिस्सा लेने के लिए कुरुक्षेत्र जा रहे थे। युद्ध में जाते समय उनकी माता ने उनसे वचन लिया था कि रास्ते में उन्हें जो भी हारा हुआ व उनसे किसी भी तरह की मदद मागें तो तुम उसको पुरा करोगें। इसी वचन के कारण श्री कृष्ण जानते थे कि बर्बरीक हारी हुई टीम का साथ देगें। अर्थात पाण्डवों का विरुद्ध तथा कौरवों का साथ देगें।

इसी कारण बर्बरीक को रोकने के लिए श्री कृष्ण गरीब ब्राह्मण बनकर बर्बरीक के सामने आए। और उनसे पूछने लगें कि तुम कौन हो। बर्बरीक ने कहा कि मैं एक दानवीर योध्दा हूँ। मैं अपने एक बाण से ही महाभारत का युद्ध समाप्त कर सकता हूँ। यह सुन कर श्री कृष्ण ने उनकी परीक्षा लेनी चाही। तभी बर्बरीक ने अपना एक बाण चलाया जिससे पीपल के पेड़ के सारे पत्तों में छेद हो गया व एक पत्ता श्री कृष्ण के पैर के नीचे होने के कारण वह बाण श्री कृष्ण के पैर के ऊपर जाकर रूक गया।

श्री कृष्ण को दिया शीश दान में 

भगवान्  श्री कृष्ण बर्बरीक की क्षमता को देखकर उन्हें इस युद्ध में भाग लेने से रोकने के लिए बर्बरीक से कहा – तुम तो बडे़ पराक्रमी व दानवीर हो। मुझ गरीब ब्राह्मण को दान नही दोगें। बर्बरीक ने जब दान मांगने के लिए कहा तो श्री कृष्ण ने बर्बरीक से उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक तभी समझ गए कि यह कोई साधारण ब्राह्मण नही है। उन्होंने श्री कृष्ण को अपना परिचय देने को कहा। जैसे ही श्री कृष्ण ने अपना परिचय दिया तभी बर्बरीक ने खुशी-खुशी अपने हाथों से शीश का दान दे दिया।

श्री कृष्ण ने बर्बरीक से कहा तुमने इतना बड़ा दान दिया है। मैं बहुत खुश हूं। तुम कुछ मागों जो तुम्हारी इच्छा हो। तब बर्बरीक ने महाभारत युद्ध देखने की इच्छा जताई। श्री कृष्ण ने शीश को अमृत पान करवाकर ऊचें स्थान पर रख दिया, जहाँ से युद्ध देखा जा सके।

जीत का श्रेय 

युद्ध समाप्त होने के बाद पाडंव जीत का श्रेय लेने के लिए वाद-विवाद कर रहे थे। तभी श्री कृष्ण सभी पाडंवों को शीश के पास लेकर गए और कहा कि इन्होंने सारा युद्ध देखा है। तथा ये बता सकते है कि इस युद्ध का श्रेय किसे जाता हैं। बर्बरीक ने बताया कि युद्ध का पूरा श्रेय श्री कृष्ण को जाता हैं। इन्होंने ही अपने सुदर्शन चक्र को चला कर सभी योध्दा को रणभूमि में परास्त किया था।

कृष्ण जी बर्बरीक से प्रसन्न होकर उनके शीश को वरदान देते हुए कहते हैं – बर्बरीक मैं अपनी समस्त शक्तियाँ तुम्हें देता हूँ। और तुम कलयुग में मेरे श्याम से ही पूजें जाओगे तथा तुम्हें कलयुग का राजा कहा जाएगा। जैसे – जैसे कलयुग का समय आगे बढ़ता जाएगा। वैसे – वैसे तुम्हारे भक्तों की सख्यां भी बढ़ती जाएगी। तुम अपने वचन के अनुसार ही हारे का सहारा कहलाओगे। और तुम्हारे स्मरण मात्र से ही भक्तों का कल्याण होगा। उन्हें धर्म, काम, धन, मोक्ष की प्राप्ति होगी।

यह ऐतिहासिक स्थान आज लाखों लोगों के लिए आस्था का केंद्र बना हुआ है।

दर्शनों की रहती है लम्बी कतार

Khatu Shyam Dham

मैं जब अनेकों लोगों के साथ खाटू श्याम जी पहुंचा तब दर्शनार्थ आने वालों की लंबी कतार थी । भक्त गण नाचते गाते खाटू श्याम बाबा के दर्शन करने को आतुर थे । प्रत्येक भक्त के मुंह से एक ही चर्चा थी कि हारे के सहारे की जय। हमारे दुखों को वो ही दूर करेंगे ।

हमने लंबी लाइन में लग कर खाटू श्याम जी के मैन मंदिर में दर्शन किए । दर्शन कर एक अलग ही ऊर्जा का अनुभव किया । ऐसा लगा खाटू श्याम बाबा ने सारे दुख हर लिए हैं। वहां जो भी भक्त जाता है उनके लिए रुकने की भी शानदार व्यवस्था है । अनेकों भक्तों ने धर्मशालाएं बना रखी है। इनमें रुकने के साथ खाने आदि की अच्छी सुविधा है । खाटू श्याम जी की यात्रा मेरे लिए बहुत रोमांचित करने वाली और श्रद्धा का जबरदस्त स्वरूप दिखाने वाली रही ।

खाटू जी से आते वक्त हमने सालासर जी मे भी दर्शन किए। और फिर हम हरियाणा वापिस आ गये।

 खाटू श्याम बाबा के धाम कैसे पहुंचे – 

आपको खाटू श्याम बाबा के जाने के लिए bus service, railway service and air service की सुविधा उपलब्ध है। अगर आप चाहे तो

खाटू श्याम धाम [ Khatu Shyam Dham ] अपने personal vechical से भी जा सकते है।

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