Raghav Kumawat की कविता : दो कदम चला नही कि हांफ गया
भीलवाड़ा जिले के एक छोटे से कस्बे प्रताप सिंह बारहठ की धरती शाहपुरा के Raghav Kumawat उदयमान कवि है. वे अपनी कविताओं में सकारात्मकता को महत्त्व देते हैं. हिम्मत बंधाने वाली कविताओं से लगता है वे खुद भी कठिनाइयों के दौर में धर्य पूर्वक आगे बढे हैं. इसी कारण लेखन हो या समाज सेवा सबमे पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साहब के विचारों का प्रभाव साफ देखा जा सकता है.
राघव ने 2 वर्ष तक ऐ. पी.जे. अब्दुल कलाम द्वारा संचालित एनजीओ लीड इंडिया 2020 के तहत 70 से अधिक विद्यालयों में जा कर उनके विचारो को पहुंचाया है. वर्तमान में ऐसे कवियों की कमी नज़र आ रही थी. अब लगता Raghav Kumawat जैसे युवा कवि उस कमी को पाट सकते हैं. अपनी कविताओं से केवल उफान या मनोरंजन के भाव ही नही बल्कि साहस, धर्य और शांत चितता के भाव भी विकसित कर सकते हैं.
तथास्तु टी वी के पाठकों को राघव कुमावत की कविता जीवन को नये अंदाज में जीने की और समझने की प्रेरणा प्रदान करेगी ऐसा विश्वास है.

पढ़िए Raghav Kumawat की कविता
दो कदम चला नही कि हांफ गया
इतनी सी मुश्किल से तू कांप गया,
दो कदम चला नहीं कि हांफ गया।
तू हर रोज सोचता है कि मुझे कुछ बड़ा करना है ,
कभी सोच कर देखा है तुझे क्या करना है ।
मनोरंजन की दुनिया में क्यूं डूबता जा रहा है ,
अपनी मंजिल को छोड़कर दूर भागता जा रहा है।
तेरा मन बोलेगा कुछ पल रुकने को ,
मंजिल बोलेगी कभी ना थकने को ।
पहाड़ों सी अटल है हर मुश्किल तुझे गिराने को ,
तू बन भूकंप हर मुश्किल को ढहाने को ।
समय की हर एक बूंद तेरे हाथ में है,
कुछ कर गुजरने का जज्बा है तो मंजिल तेरे पास में है ।
ना दिन दिन लगे ना रात रात लगे, दृढ़ निश्चय है तो हर मुश्किल तुझे आसान लगे।
इतनी सी मुश्किल से तू कांप गया,
दो कदम चला नही की हांफ गया।
राघव कुमावत
