ये लड़के इतना हुनर कहाँ से लाते है Poem by Sushma Parakh
पुरुषों के लिए विशेष कविता
ये लड़के बड़े बखूबी बेटा,भाई,पति,पिता के किरदारों को निभाते है।
पिता के किरदार तक आकर पूरा जीवन समझ जाते है।
एक नन्हा मुन्ना बेटा,
वो मस्त मौला भाई,
मस्त मिज़ाज पति..
जीवन में गंभीर रोल निभाते है.
जब से वो पिता बन जाते है ..ये लड़के इतना हुनर कहाँ से लाते है ……

यें लड़के जीवन को माँ की खुशियों से शुरू करते है
बहन के सपनो को पूरा करते करते बीवी के नख़रों को उठाते है
फिर अपने बच्चों के भविष्य को सवारने में पूरा जीवन मगन हो जाते है,
कहाँ समय वो अपने लिए पाते है
ये लड़के कितने बेख़ुबी बेटा, भाई, पति, पिता के किरदार निभाते है… ये लड़के इतना हुनर कहाँ से लाते है ………
तकलीफ़ों के घूँट खुद ही पी जाते है.
घर में मुस्कुराते हुए आकर एक माँ, बहन, पत्नी और बच्चों की दुनिया रंगीन और हँसी बनाते है
ये लड़के इतना हुनर ……….
कितनी भी तकलीफ़ हो दिल मैं बस अपनो के लिए मुस्कुराते है
मुश्किलों के मौसम में परिवार के लिए फ़ौलाद चटान वो बन जाते है
ख्वाहिशो को अपने दिल में दबाकर पूरा जीवन समर्पण हि करते जाते है
ये लड़के बड़ा से बड़ा त्याग आसानी से कर जाते है
अहसास भी नही दिलाते बस मुस्कुराकर हर तकलीफ़ को छुपाते है… ये लड़के इतना …….
बचपन के शौख को दिल में दबाकर परिवार की ख़ुशियाँ बटोरने लग जाते है.
हर दर्द दबाकर बस दिनरात दोङते जाते है.
अपनो के लिए जिना ही मक़सद अपना बनाते है… ये लड़के इतना हुनर ……
कम चीजों में भी अपने आप को एकदम संतुष्ट पाते है.
तंगी हो हाथ में चाहे पोकेट ख़ाली हो ,
फिर भी बच्चों के सपने पूरा करने बिना रुके भागते जाते है ,
कष्ट खुद देखकर परिवार के चेहरों में हँसी वो सजाते है… ये लड़के इतना हुनर ………
बीवी के ताने और माँ की शिकायत सहज सुनते जाते है.
दोनो के सामंजस्य का पूल वो बांधते जाते है ,
सहनशील इतने कैसे वो हो जाते है… ये लड़के इतना हुनर ……
जीवन के उतार-चढ़ाव को समभाव से सहते जाते है.
तंगी खुद हर चीज़ की देखकर ,परिवार की ज़रूरतें पूरी करने में लग जाते है .
ये लड़के ये लड़के इतना हुनर ……..
वो नटखट, लाड़ले, शरारती लड़के कब यूँ समझदार बन जाते है.
ज़िद्द जो करते थे कल तक हर खिलाने का ,
आज वो अपनी बड़ी से बड़ी ज़रूरत को इग्नोर कर जाते है.
ये लड़के कैसे इतने सयाने हो जाते है ….ये लड़के ये लड़के इतना हुनर कहाँ से लाते है …….
Tathastu TV की तरफ से लड़के इतना हुनर कहाँ से लाते की रचनाकार के सन्दर्भ में
सुषमा पारख जैन समाज की सक्रिय कार्यकर्ता है। सबको साथ लेकर चलने की क्षमता से सम्मान प्राप्त करती है। कविताओं की रचना और उनकी प्रस्तुति दोनों ही प्रभावी है। इनकी यह प्रेरणा से भरी कविता सबको रुचिकर लगेगी, ऐसा विश्वास है।
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