Unique world record अनोखा विश्व कीर्तिमान
जैन धर्म सबसे प्राचीन धर्म है. इस धर्म के सिद्धांत हर समाज के लिए ग्रहणीय है. कोरोना काल में जैन मुनियों द्वारा पहने जाने वाली मुह्पत्ति काफी चर्चित रही है. चारो और एक ही आवाज़ उठ रही थी कि covid 19 में मुहपत्ति की तरह सबको मास्क पहनना पद गया है. कोरोना महामारी में जैन सिद्धांत काफी उपयोगी महसूस किये गए. इन सिद्धांतों के कारण जैन धर्म विश्वव्यापी बना है. जैन सिद्धांतों पर जीवन यापन करने वाले मुनियों और साध्वियों का जीवन भी आश्चर्यजनक कहा जाता है. उनके द्वारा सर्दी हो या गर्मी, मान हो अपमान हर परिस्थियों में समताभाव रखने की साधना बेजोड़ है. ऐसे साधको ने अनेक Unique world record बनायें हैं. आज ऐसे ही अनोखे विश्व कीर्तिमान की इस कविता के माध्यम से की जा रही है.
अमिता संचेती ने अपनी कविता में जैन मुनियों द्वारा की जाने वाली तपस्या को अपना विषय बनाया है. तपस्या करना बहुत ही कठिन कार्य है. जहाँ एक घंटे भी भूख को सहन करना संभव नही होता वहीँ महीनो महीनो बिना खाए तपस्या में लीं होना कितना मुस्किल होता होगा वो आप खुद सोच सकते हैं. जैन श्वेताम्बर स्थानकवासी संप्रदाय के अशोक मुनि जी म. सा. द्वारा 98 मासखमण तप कर अनोखा विश्व कीर्तिमान बनाया गया है. मासखमण यानि लगातार 30 दिनों तक पानी के आलावा कुछ नही खाना. 30 दिनों का एक मासखमण, ऐसे 98 मासखमण. सामान्य व्यक्ति के बस की बात नही है. ऐसा कोई विरला साधक ही कर सकता है. उनके इस महान तप पूर्ण जीवन ए लिए कविता के माध्यम से अमिता संचेती की भावांजलि.
अनोखा विश्व कीर्तिमान -: कविता :- Unique world record

