26 January वीर जवानों के लिए अमिता संचेती की कविता

सरहद पर देश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सैनिको को 26 January पर विशेष रूप से याद किया जाता है. हमारे सैनिक अपने त्यौहार और परिवार से दूर रहकर सर्दी हो या गर्मी, हर समय अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहते हैं. अमिता संचेती ने ऐसे वीर जवानों को अपने द्वारा रचित डॉ कविताएँ समर्पित की है. 26 January गणतंत्र दिवस का यह दिन देश भक्ति का दिन है. सैनिकों के फौलादी जज्बों को प्रस्तुति देने का दिन है. तथास्तु टी. वी  के पाठको के लिए यह कविताएँ प्रस्तुत है.

 

26 January

देखकर संविधान अपना हो रहा था नाज

पूरा भारत मना रहा
गणतन्त्र दिवस को आज
अधिकार और कर्तव्यो का
मिला था सबको ताज
देखकर संविधान अपना
हो रहा था नाज
अध्यक्षता का भार लिया
डा० राजेन्द्र प्रसाद
जाति धर्म छुआछूत का
भेदभाव हुआ दूर
भारत की अखंडता का
सपना हो गया पूर्ण
मतदान से मिल गया
जनता को अपना हक
चुन सकती सरकार अब
मरजी से बेशक
लाखों बलिदानों के बाद
चैन की मिली श्वास
परतंत्रता की बेडियो से
भारत हुआ आजाद
हमारी हिफाजत के लिए
दे रहे बलिदान
वतन की सुरक्षा में
आने न देते आँच
तनमन जीवन अर्पण किया
फर्ज प वतन के नाम
उनके शौर्य और त्याग को
हमारा कोटि कोटि प्रणाम

फोलादो सा सीना

Amita Sancheti
जो मौत की छाया में
जीवन के रास रचाते हैं
होली दिवाली और राखी
सरहद पे ही मनाते है
माँ पत्नी परिवार छोड़
सीमा पर पहरा लगाते हैं
अपनी परवाह किये बिना
हमारी जान बचाते हैं
फोलादो सा सीना लेकर
दुश्मन से जा टकराते है
धरती को माता कहकर
मिट्टी माथे से लगाते है
टूट पडते है शेर की भांति
वैरियो को धूल चटाते है
माँ भारती को शीश नमाकर
मौत को गले लगाते है
तिरंगे का कफन ओढ़कर
अलविदा कह जाते है
ऐसे वीर शहीदों के चरणों में
 हम शत शत शीश झुकाते हैं।
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