वृश्चिक राशि में shukra ka gochar : राशियों पर क्या होगा प्रभाव
shukra ka gochar वृचिक राशि में प्रारंभ हो रहा है. यह आपके जीवन पर विशेष प्रभाव डालता है. इस पर जैन मुनि जी का विश्लेषण प्रस्तुत है.
मेरे गुरूदेव, ज्योतिष विशारद, माँ भगवती के उपासक, सावत्थीतीर्थ सर्जक तपागच्छाचार्य आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा के सूक्ष्म अवलोकन, अध्ययन, मनन. चिंतन के बाद की संक्षिप्त जानकारी गुरुदेव कि आज्ञा से में मुनि अजितचन्द्र विजयजी 12 राशी का फलादेश प्रस्तुत करता हू ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्र को सभी नवग्रहों में बेहद शुभ ग्रह की उपाधि दी गयी है। शुक्र ग्रह विशेष रूप से वृषभ और तुला राशि का स्वामी है। इसके साथ इस ग्रह को मीन राशि में उच्च और कन्या राशि में निम्न प्रभाव वाला माना जाता है। कुंडली में शुक्र के प्रभाव से जातक को सांसारिक सुख और ऐश्वर्य प्राप्त होता है। इस ग्रह के प्रभाव में आने वाले जातक विशेष रूप से चित्रकारी, नृत्य, सिनेमा और रंगमंच आदि क्षेत्रों से संबंध रखते हैं। व्यक्ति की कुंडली में विशेष रूप से शुक्र की स्थिति उनके वैवाहिक जीवन की दशा भी तय करती है। आपका वैवाहिक जीवन कैसा बीतेगा ये विशेष रूप से आपकी राशि में शुक्र की स्थिति पर निर्भर करता है।
वैदिक ज्योतिष की मानें तो शुक्र ग्रह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि ये जातक को भौतिक सुख प्रदान करता है। शुक्र ग्रह की उपासना विशेष रूप से शुक्रवार के दिन की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुक्र दैत्यों के गुरु कहे जाते हैं। शुक्र के शुभ प्रभाव से व्यक्ति सांसारिक जीवन में समस्त सुख-साधनों को प्राप्त करता है। वहीं इसके अशुभ प्रभाव से मनुष्य में संस्कार हीनता, यौन जनित रोग तथा परिवार में बिखराव की स्थिति निर्मित होती है। शुक्र ग्रह की शांति के लिए इसकी उपासना शुक्ल पक्ष में आने वाले शुक्रवार से प्रारंभ करनी चाहिये। चूंकि शुक्र को विवाह का कारक भी कहा जाता है इसलिए अविवाहित जातकों को शुक्र की उपासना अवश्य करनी चाहिये।
कला, सौंदर्य के कारक ग्रह shukra ka gochar. शुक्र ग्रह 11 दिसम्बर 2020, शुक्रवार की प्रातः 05:04 बजे अपनी स्वराशि तुला से निकल कर मंगल के आधिपत्य वाली वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र के गोचर का खास प्रभाव सभी बारह राशियों पर देखने को मिलेगा क्योंकि यह एक अग्नि तत्व राशि है और शुक्र की प्रकृति से भिन्न है। shukra ka gochar की अवधि काफी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इससे जीवन में ख़ुशियों की लहर दौड़ जाती है और शुभ कार्य संपन्न होते हैं।
मेष :~ अ, ल, इ :
ज्योतिष विशारद आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र ग्रह दूसरे और सातवें भाव का स्वामी है। यह आपके लिए मारक ग्रह भी कहलाता है। इस वजह से अत्यधिक शुक्र संबंधित कार्यों में संलिप्तता आपकी राशि के लोगों को कष्ट पहुंचा सकती है। शुक्र का यह गोचर आपकी राशि से अष्टम भाव में होने वाला है जो कि अधिक अनुकूल नहीं कहा जा सकता है क्योंकि अष्टम भाव अचानक से होने वाली गतिविधियों और अनिष्ट का भाव भी कहा जाता है। हालांकि शुक्र ग्रह को अष्टम भाव में अधिक अशुभ परिणाम देने वाला नहीं माना गया है।
ऐसी स्थिति में आपको अपने स्वास्थ्य का पूर्ण रूप से ध्यान रखना चाहिए। अत्यधिक भोग और विलास में रत रहने से आपका शरीर जीर्ण हो सकता है और आपको शुक्र जनित बीमारियाँ होने की संभावना बन सकती है। कुछ लोग गुप्त रूप से सुखों को भोगने की लालसा रखेंगे और अनावश्यक खर्च करेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति भी डांवाडोल हो सकती है।
इस समय खंड में आपका जीवन साथी अपने परिवार वालों अर्थात आपके ससुराल वालों से मेल मुलाकात करेगा और आपको भी उनसे मिलने का अवसर मिलेगा। इस समय काल में आपको अपनी दिनचर्या को संयमित रखना चाहिए और अपने खान-पान पर भी विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। इस गोचर के प्रभाव से व्यापार में कुछ उतार-चढ़ाव की स्थितियां बनेंगी, जिनकी वजह से आपकी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
shukra ka gochar की अवधि में आपको कहीं भी धन निवेश करने से बचना चाहिए क्योंकि उसमें नुकसान होने की संभावना अधिक रहेगी। अधिक प्रयास करने से आंशिक तौर पर धन लाभ होने के योग बनेंगे।
वृषभ :~ ब, व, :
माँ भगवती के उपासक आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे आपके लिए शुक्र का कोई भी गोचर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि शुक्र आपकी राशि का स्वामी ग्रह है। यह आपकी राशि के स्वामी होने के साथ-साथ आप के छठे भाव का स्वामी भी है और अपने वृश्चिक राशि में गोचर के दौरान आपकी राशि से सप्तम भाव में प्रवेश करेगा। सप्तम भाव आपके आयात निर्यात तथा दीर्घकालीन साझेदारियों का भाव है। इससे आपके दांपत्य जीवन के बारे में भी पता चलता है और सामाजिक रुप से आपकी छवि का भी ज्ञान होता है।
shukra ka gochar आपके लिए अनेक प्रकार की शुभ सूचनाएं लेकर आएगा। आपके स्वास्थ्य में मजबूती आएगी और पुरानी चली आ रही किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या से मुक्ति मिलेगी। इस समय में आपके व्यक्तित्व और वाणी में आकर्षण बढ़ेगा और लोग आपकी तरफ बरबस ही खिंचे चले आएँगे। इससे आपको लोगों का सहयोग और सानिध्य मिलेगा तथा आपके काम बनने लगेंगे। आर्थिक दृष्टिकोण से शुक्र का यह गोचर अनुकूल रहेगा और आप को व्यापार में उत्तम लाभ होगा। आप जिनके साथ मिलकर पार्टनरशिप में बिज़नेस करते हैं, उनसे भी आपके संबंध बढ़िया रहेंगे और संबंधों में घनिष्ठता होने से आप एक दूसरे के प्रति समझदारी रखते हुए अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।
दांपत्य जीवन के दृष्टिकोण से शुक्र का यह गोचर और भी अधिक अनुकूल रहेगा और आपके रिश्ते में प्रेम बढ़ेगा। आप और आपके जीवनसाथी के मध्य नज़दीकियां बढ़ेंगी और रोमांस के अवसर मिलेंगे, जिससे दांपत्य जीवन पुनः खिल उठेगा। इस समय में आपको एक बात का ध्यान रखना होगा कि आपके कुछ विरोधी सक्रिय होकर आपको परेशान करने का प्रयास करेंगे। यह समय अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए उत्तम रहेगा। आपका कलात्मक पक्ष लोगों के सामने आएगा और समाज में आपकी लोकप्रियता बढ़नी शुरू होगी।
मिथुन :~ क, छ, घ :
मंत्र वेत्ता आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे आपकी राशि के लिए शुक्र पांचवे और बारहवें भाव का स्वामी है और shukra ka gochar आपकी राशि से छठे भाव में होगा। छठे भाव को विभिन्न प्रकार के संघर्षों का भाव भी कहा जाता है क्योंकि इस भाव से शारीरिक समस्याएं, उधार, कर्ज तथा शत्रुओं और विरोधियों के बारे में पता चलता है। यह भाव चुनाव और कंपटीशन का भाव भी है। इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है और आप बीमार पड़ सकते हैं। विशेष रूप से मूत्र जनन तंत्र से संबंधित कोई समस्या इस समय में आपको परेशान कर सकती है, इसलिए विशेष रूप से अपने खान-पान और अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें।
इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपको अपने खर्चों में वृद्धि होती हुई दिखाई देगी और यह वृद्धि इतनी होगी कि आप उस पर नियंत्रण नहीं लगा पाएंगे, जिसकी वजह से आपका बजट बिगड़ सकता है, इसलिए पूर्व में ही सुनियोजित तरीके से अपने वित्त का प्रबंधन करें ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो। आपकी राशि के विद्यार्थियों के लिए यह गोचर अनुकूल रहेगा और उन्हें अपनी शिक्षा में समुचित परिणाम प्राप्त होंगे लेकिन उन्हें स्वयं की एकाग्रता को भंग होने से बचा कर रखना होगा क्योंकि इस दौरान ऐसी संभावना बन रही है। यदि आप शादीशुदा हैं तो आपकी संतान को प्रगति मिलेगी और वे जिस क्षेत्र में भी हैं, उसमें अच्छा प्रदर्शन करने में कामयाब रहेंगे।
यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो यह समय आपके प्रेम जीवन को निखारने वाला साबित होगा और आप अपने प्रियतम को अपने दिल की गहराई से प्रेम करेंगे, जिससे आपके बीच का रिश्ता और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा और आप रिश्ते में आगे बढ़ेंगे।
कर्क :~ ड, ह :
गुरुदेव आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे शुक्र ग्रह आपकी राशि के लिए चौथे और ग्यारहवें भाव का स्वामी है। इस प्रकार यह आपके सुख और लाभ भाव का स्वामी होकर अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह है और शुक्र का गोचर वृश्चिक राशि में आपके पंचम भाव में होगा। पंचम भाव एक शुभ त्रिकोण भाव माना गया है। इस भाव से हमारी बुद्धि और निर्णय लेने की क्षमता, हमारे जीवन के रुझान, हमारे प्रेम संबंध, हमारी संतान तथा कलात्मकता के बारे में भी काफी हद तक जानकारी मिलती है।
shukra ka gochar के प्रभाव से आपके प्रेम संबंध को संजीवनी मिलेगी अर्थात यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आपका प्रेम जीवन बहुत सुंदर होगा। आपके रिश्ते में प्रेम, अपनापन, स्नेह और एक दूसरे से जुड़ाव बढ़ेगा। आप अपने प्रेम जीवन को और भी बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे, जिससे आपको अच्छी अनुभूति होगी और जीवन में खुशी मिलेगी।
इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपकी आमदनी में उत्तरोत्तर वृद्धि होनी शुरू हो जाएगी और आपकी आर्थिक स्थिति पूर्व के मुकाबले अधिक मजबूत होने की दिशा में आगे बढ़ेगी। आप अपनी किसी कलात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से स्वयं को समाज में आगे बढ़ाएंगे और इससे भी आपको आर्थिक तौर पर लाभ होने के साथ-साथ आपका सामाजिक दायरा भी वृद्धि को प्राप्त होगा। इस समय काल में आप अपनी किसी छुपी हुई प्रतिभा को बाहर निकाल सकते हैं। आपका मन कुछ ऐसे कार्यों में लगेगा, जो लोगों के सामने एकदम से प्रत्यक्ष नहीं होंगे।
यदि आप शादीशुदा हैं तो आपकी संतान के लिए यह समय बहुत महत्वपूर्ण होगा। जहां एक ओर उनके अंदर नए-नए गुणों का विकास होगा और वे जीवन मूल्यों को समझेंगे, तो वहीं उन्हें सुख और समृद्धि की प्राप्ति भी होगी और वे मानसिक तौर पर प्रसन्न रहेंगे।
सिंह :~ म, ट :
स्पष्ट वक़्ता आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे शुक्र ग्रह आपकी राशि के लिए तीसरे और दसवें भाव का स्वामी है। दसवाँ भाव आपके व्यवसाय अर्थात प्रोफेशन को भी बताता है और तीसरा भाव आपके भाई बहनों और आपके प्रयास करने की क्षमता का परिचायक है।
shukra ka gochar आपकी राशि से चतुर्थ भाव अर्थात सुख स्थान में होगा। चतुर्थ भाव को सुख भाव और मातृ भाव भी कहा जाता है। इस भाव से माता, सुख, चल व अचल संपत्ति तथा जीवन में सभी प्रकार की सुख सुविधाओं को देखा जाता है। शुक्र का गोचर इस भाव में होने से आपकी सुख समृद्धि में बढ़ोतरी होगी। आपको विभिन्न माध्यमों से कुछ अच्छी वस्तुओं की प्राप्ति होगी, जो आपकी सुख सुविधा को बढ़ाएंगे। परिवार में आप कोई नया सामान खरीद कर ला सकते हैं जिससे टेलीविजन, फ्रिज़, रेफ्रिजरेटर, आदि जो आपको सुख प्रदान करें। परिवार का माहौल भी अच्छा रहेगा और इस समय घर की साज-सज्जा या आर्किटेक्चर पर विशेष रूप से आप ध्यान देंगे और घरेलू खर्च भी करेंगे। परिवार में कुछ बातों को लेकर कहासुनी भी संभव है, इसलिए थोड़ा सावधानी जरूर बरतें।
यह समय आपके कार्यक्षेत्र के लिए अनुकूल रहेगा और आप जो प्रयास करेंगे, वे आपके लिए फ़ायदेमंद साबित होंगे। आपको अपने काम पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना पड़ेगा ताकि विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकला जा सके। आप अपने प्रयासों से अपनी निजी और पेशेवर जिंदगी को बेहतर बनाने का प्रयास करेंगे और इसमें आपको काफी हद तक सफलता भी मिलेगी, जिससे आपके अंदर एक संतुष्टि का भाव जागृत होगा। आपकी माता जी को भी इस समय काल में अच्छे परिणाम मिलेंगे और वे सुख का आनंद लेंगी।
इस समय काल में आपके परिवार की आमदनी बढ़ेगी और समाज में आपका मान-सम्मान भी बढ़ेगा। परिवार में कोई शुभ कार्यक्रम संपादित हो सकता है, जिसमें लोगों का आना जाना लगा रहेगा और परिवार का माहौल भी उल्लास पूर्ण रहेगा।
कन्या :~ प, ठ, ण
सावत्थी तीर्थ सर्जक आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे आपकी राशि के स्वामी बुध का परम मित्र शुक्र आपकी राशि के लिए दूसरे और नवम भाव का स्वामी है। इस प्रकार एक मारक भाव और दूसरा भाग्य भाव का स्वामी होने से शुक्र आपके लिए महत्वपूर्ण ग्रह है। शुक्र का वृश्चिक राशि में गोचर आपकी राशि से तीसरे भाव में होगा। तीसरे भाव से हमारी कम्युनिकेशन स्किल, संवाद करने की क्षमता, छोटी यात्राएं, छोटे भाई बहन और रिश्तेदार तथा पड़ोसियों के बारे में भी जानकारी मिलती है। शुक्र के तीसरे भाव में गोचर करने की वजह से आपके प्रयासों में तेजी आएगी और आप अपने जीवन में अच्छी चीजों को प्राप्त करने के लिए अधिक मेहनत और प्रयास करेंगे। आपके भाग्य में बढ़ोतरी होगी और भाग्य की प्रबलता के चलते आपके कई रुके हुए काम बनने लगेंगे, जिससे आर्थिक तौर पर भी लाभ होगा और सामाजिक दायरे में भी बढ़ोतरी होगी।
आप अपने छोटे भाई बहनों की भी यथासंभव मदद करेंगे और यदि उन्हें आवश्यकता होगी तो आर्थिक तौर पर भी आप उनके साथ खड़े रहेंगे। इस समय में आप स्वयं को काफी मजबूत स्थिति में पाएंगे और दूसरों के बारे में सोचना आपकी मुख्य सोच बन जाएगी। किसी धार्मिक स्थल की सैर करने या छोटी दूरी की यात्राओं पर जाने में आपको खुशी होगी और आप इस दिशा में बढ़ चढ़कर प्रयास भी करेंगे। इस अवधि में अपने छोटे भाई बहनों को साथ लेकर आप कोई फिल्म देखने या साथ खाने-पीने भी जा सकते हैं। इससे आपके बीच का रिश्ता और भी अधिक घनिष्ठ बनेगा।
इस समय काल में आपके पड़ोसियों या कुछ रिश्तेदारों विशेष से किसी बात को लेकर आपका झगड़ा भी हो सकता है, इसलिए थोड़ा सावधान रहें और एक बात का विशेष ख्याल रखें कि यदि किसी अन्य व्यक्ति का झगड़ा हो रहा है तो आप उसमें हस्तक्षेप या बीच-बचाव ना करें क्योंकि इससे आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है। अपने सहकर्मियों से अपना व्यवहार अच्छा बनाए रखें ताकि वे हर काम में आपकी मदद करें। इससे आपको कार्यक्षेत्र में भी लाभ होगा।
तुला राशि को विशेष लाभ देगा shukra ka gochar
तुला :~ र, त :
विसा यंत्र साधक आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे शुक्र ग्रह आपकी राशि का स्वामी है, इसलिए शुक्र का कोई भी गोचर आपके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होता है। आपकी राशि अर्थात आप के प्रथम भाव का स्वामी होने के साथ-साथ शुक्र ग्रह आपके अष्टम भाव का स्वामी भी है और अपने इस गोचर काल में वह आपकी राशि से दूसरे भाव में स्थापित होगा। दूसरे भाव को धन भाव भी कहा जाता है क्योंकि इस भाव से आपका संचित धन, आपका कुटुंब, आपका खान-पान, आपका मुख मंडल तथा आपकी वाणी का विचार भी किया जाता है।
इस गोचर के प्रभाव से आपकी धन प्राप्ति की इच्छा पूर्ण होगी और आपको विभिन्न प्रकार से धन प्राप्त होने के संयोग बनेंगे। अचानक से भी आपको धन मिल सकता है, जिसकी आपने कल्पना ना की हो और इससे आपकी आर्थिक स्थिति अचानक से ही बढ़िया हो जाएगी। इसके अतिरिक्त, कुछ लोगों को अपने ससुराल पक्ष की ओर से भी सुख संसाधनों की प्राप्ति हो सकती है, जो कि प्रेम वश वे आपको प्रदान करेंगे।
shukra ka gochar परिवार में लंबे समय से चले आ रहे तनाव से मुक्ति दिलाने में भी कारगर साबित होगा और लोगों के बीच एक दूसरे को समझने की प्रवृत्ति जन्म लेगी। आप अपने परिवार पर पूरा ध्यान देंगे और अपने परिवार की बेहतरी के लिए कुछ नए कदम भी उठाएंगे, जिसमें आपको कुछ कड़वा भी बोलना पड़ सकता है लेकिन यदि आवश्यक हो, तो आप इस दिशा में आगे बढ़ें।
आपका मन सुखों की ओर भागेगा और इस पर आप धन भी खर्च करेंगे लेकिन चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि धन आपके पास पहले से ही मौजूद होगा, इसलिए आप इस समय को काफी आनंदित होकर व्यतीत करेंगे। आप अपने धन को संचित करने में भी सफल होंगे, इसलिए आपका बैंक बैलेंस भी इस समय में बढ़ेगा। व्यापार के मामले में किए गए प्रयास आपको सफलता दिलाएंगे और आर्थिक लाभ भी।
वृश्चिक :~ न, य :
तपागच्छाचार्य आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे शुक्र ग्रह आपकी राशि के लिए सातवें तथा बारहवें भाव का स्वामी है और शुक्र का गोचर वृश्चिक राशि में आपकी ही राशि में होगा अर्थात आप के प्रथम भाव में। प्रथम भाव से हमारा मस्तिष्क, हमारी सोचने समझने की क्षमता, हमारा व्यक्तित्व, समाज के समक्ष हमारा चेहरा और शारीरिक गठन व रंग रूप का विचार किया जाता है। शुक्र ग्रह के इस भाव में गोचर के परिणाम स्वरूप आपके अंदर सहज रूप से प्रेम और स्नेह की भावना का जन्म होगा। आप नई-नई ऐसी चीजें खरीदना पसंद करेंगे, जो आपको सुख दे सकें और आपके लिए आनंद का विषय हों।
इस अवधि में आप अपने मनोरंजन पर भी खर्च करेंगे और कोई नया गैजेट भी खरीद सकते हैं। आप अपने व्यक्तित्व में सुधार लाने का भी खूब प्रयास करेंगे। चाहे सौंदर्य प्रसाधन हो अथवा कोई विशेष प्रकार के कपड़े, आप सभी कुछ अपने लिए प्राप्त करना चाहेंगे। इससे आपके खर्चे जरूर बढ़ेंगे लेकिन यह सब आपको संतुष्टि देगा और आपको प्रसन्नता मिलेगी।
शुक्र का यह गोचर आपके आपके दांपत्य जीवन के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं होगा और यदि कोई तनाव आप और आपके जीवनसाथी के मध्य चला रहा है तो आपको उससे निजात मिलेगी। आपके रिश्ते में प्रेम और रोमांस बढ़ेगा तथा साथ में कहीं वक्त बिताने के अच्छे मौके मिलेंगे। इस समय काल में आपके व्यापार में वृद्धि होगी और आपको अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे, जिससे धन लाभ भी होगा। हालांकि कुछ लोगों को स्वास्थ्य में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है, जिसकी वजह से वे कुछ परेशान हो सकते हैं।
धनु :~ भ, ध,फ :
प्रवचनकार आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे धनु राशि के जातकों के लिए shukra ka gochar बारहवें भाव में होगा। शुक्र ग्रह आपकी राशि के लिए छठे भाव के साथ साथ एकादश अर्थात लाभ भाव का स्वामी भी है और शुक्र ग्रह का द्वादश भाव में जाना आपके लिए मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। द्वादश भाव को व्यय अथवा हानि भाव भी कहा जाता है। इस भाव से हमारे खर्चे, हमारा विदेश गमन हमारी स्वास्थ्य समस्याएं, बायाँ नेत्र, निद्रा और निद्रा से संबंधित समस्याएं, शयन सुख, आदि का विचार किया जाता है। शुक्र ग्रह के इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपको सर्वप्रथम अपने विरोधियों से सावधान रहना होगा क्योंकि इस समय काल में वे काफी प्रबल रहेंगे और आपको किसी भी प्रकार की सामाजिक और आर्थिक हानि पहुंचाने का पूरा प्रयास करेंगे। इसके अतिरिक्त आपके खर्चों में होने वाली अप्रत्याशित वृद्धि आपके मस्तक पर चिंता की लकीरें बिखेर सकती है क्योंकि यह खर्चे आपके नियंत्रण से बाहर हो सकते हैं और आपको परेशानियों में डाल सकते हैं।
इस समय काल में आपको अपने विभिन्न क्रियाकलापों पर ध्यान देना होगा और यह सीखना होगा कि कौन सा आवश्यक खर्चा है, जो आप को करना चाहिए तथा और शेष व्यर्थ के खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से यह समय अधिक अनुकूल नहीं है और आप को कोई शारीरिक समस्या हो, ऐसा संभावना बन रही है, इसलिए अपने खाने-पीने पर और अपनी दिनचर्या पर विशेष रूप से ध्यान दें ताकि समय रहते इस समस्या से दूर रहा जा सके। इस गोचर की अवधि में आप खुले दिल से दोनों हाथों से अपना धन खर्च करेंगे, बिना यह सोचे कि आगे क्या होगा लेकिन इस आदत से बाज आएं, अन्यथा बाद में पछताना पड़ सकता है। आपके मामा पक्ष के लोगों से इस समय खण्ड में आपको आर्थिक क्षति पहुंच सकती है, इसलिए थोड़ा सावधान रहें।
मकर :~ ख, ज :
तंत्राचार्य आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे आपके लिए shukra ka gochar एकादश भाव में होगा। शुक्र आपकी कुंडली में पंचम तथा दशम भाव का स्वामी ग्रह है। इस प्रकार केंद्र और त्रिकोण, दोनों भावों का स्वामी होने के कारण शुक्र ग्रह आपके लिए योगकारक ग्रह भी है जो कि आपको सभी प्रकार की सफलता देने में सक्षम है। एकादश भाव को लाभ भाव भी कहा जाता है और इस भाव से आपको होने वाले विभिन्न प्रकार के लाभ, आपकी आमदनी, आप की महत्वाकांक्षायें तथा जीवन में प्राप्तियों को देखा जाता है।
शुक्र का लाभ भाव में वृश्चिक राशि में होने वाला यह गोचर आपकी आमदनी को दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ाने का काम करेगा और आपकी पांचों उंगलियां घी में होंगी। आप की महत्वाकांक्षा पूरी होंगी, जिससे आपको हौसला भी मिलेगा। आपका समाज में सम्मान और सोशल दायरा भी बढ़ेगा तथा आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी। इस प्रकार यह गोचर आपके लिए बहुत ही फ़ायदेमंद साबित होगा। आप यदि शादीशुदा हैं तो आपकी संतान को भी इस गोचर के अनेक फायदे मिलेंगे और वे शिक्षा के क्षेत्र में जबरदस्त अनुकूलता पाएंगे। इसके अतिरिक्त, यदि आप किसी प्रेम संबंध में हैं तो शुक्र का गोचर आपके रिश्ते में चले आ रहे तनाव को दूर करने में आपकी सहायता करेगा और आपके रिश्ते में प्रेम और स्नेह की भावना को बढ़ाएगा, जिससे आपका प्रेम जीवन सुचारु रुप से चलेगा।
आपकी किसी मनपसंद कॉलेज में दाखिला लेने की इच्छा भी इस समय में पूरी हो सकती है। साथ ही परीक्षा में अच्छे अंक आने की भी प्रबल संभावना बनती है। आप काम के सिलसिले में अपने वरिष्ठ अधिकारियों से नज़दीकी बनाए रखेंगे, जिसका आपको समुचित लाभ सही समय पर अवश्य मिलेगा।
कुंभ :~ ग, स, श, ष :
प्रतिष्ठाचार्य आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे शुक्र का गोचर आपकी राशि के लिए विशेष महत्वपूर्ण स्थान रखता है क्योंकि आपकी राशि के लिए शुक्र केंद्र भाव तथा त्रिकोण भाव अर्थात चतुर्थ भाव और नवम भाव का स्वामी होने से योगकारक ग्रह है और योगकारक ग्रह अपने गोचर काल में अनेक प्रकार के अच्छे परिणाम देने में सक्षम होता है।
शुक्र का वृश्चिक राशि में गोचर आपके दशम भाव में होगा। दशम भाव को प्रोफेशन अर्थात व्यवसाय का भाव भी कहा जाता है। इसी से हमारी आजीविका का भी ज्ञान होता है और हमारे यश तथा कीर्ति के बारे में भी इसी भाव से पता चलता है। यह सबसे मजबूत केंद्र भाव होता है। शुक्र के दशम भाव में गोचर का सीधा सीधा असर आपके कार्यक्षेत्र पर पड़ेगा और आपके काम में तरक्की के योग बनेंगे। भाग्य का पूरा सहारा आपको मिलेगा, जिसकी बदौलत आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी और कार्यक्षेत्र में भी आप का प्रदर्शन सराहनीय रहेगा। आप अपने वरिष्ठ अधिकारियों की नजर में चढ़े रहेंगे, जिसकी वजह से आपको अनेक सुख सुविधाएँ आपके कार्यक्षेत्र में प्राप्त होंगी लेकिन यहां उपस्थित शुक्र एक बात के लिए आपको आगाह भी करता है कि यदि आप जरा भी लापरवाही बरतते हैं तो आपको समस्या उठानी पड़ सकती है। व्यर्थ की बहस बाजी और लोगों से किसी की बुराई करने की आदत से आपको बचना होगा, नहीं तो यह आपको नुकसान भी दे सकती है।
शुक्र का वृश्चिक राशि में गोचर आपके पारिवारिक जीवन के लिए भी अनुकूल रहेगा और परिवार में समरसता रहेगी। लोग एक दूसरे से अच्छा व्यवहार करेंगे, जिससे आपको सुख और संतुष्टि का अहसास होगा। कुछ लोग इस समय में अपने परिवार से ही अपने काम हेतु सहायता मांगेंगे, जो उन्हें मिलेगी और इससे उनका काम में और भी वृद्धि होगी। व्यापार के सिलसिले में आपको लाभ की उम्मीद करनी चाहिए।
मीन :~ द, च :
उपसर्ग विजेता आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा कहते हे शुक्र का वृश्चिक राशि में होने वाला गोचर आपकी राशि से नवम भाव में अर्थात भाग्य भाव में होगा। नवम भाव सबसे मजबूत त्रिकोण भाव माना जाता है। इस भाव से आपका भाग्य, लंबी दूरी की यात्राएं, तीर्थ यात्राएं, धार्मिक परोपकार के कार्य, धर्म गुरु तथा गुरु तुल्य लोग, आदि के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। शुक्र आपकी राशि के लिए तीसरे और आठवें भाव का स्वामी है। इस प्रकार शुक्र का यह गोचर आपको मिश्रित परिणाम देने वाला साबित होगा।
शुक्र के इस गोचर के परिणाम स्वरूप आपको अचानक ही कुछ बड़े उतार-चढ़ाव अपने जीवन में महसूस होंगे, जिसमें से कुछ अच्छे भी होंगे और कुछ बुरे भी। इनमें आपको आर्थिक तौर पर कोई बड़ा लाभ हो सकता है, जो आपकी आर्थिक चुनौतियों को दूर करने में सक्षम साबित होगा। वहीं इसके विपरीत, आपके किसी गुरु समान व्यक्ति अथवा पिता को शारीरिक कष्ट भी इस समय काल में हो सकते हैं, जिसकी वजह से आप मानसिक तौर पर चिंतित रहेंगे। इस गोचर के प्रभाव से परिवार में आपके छोटे भाई बहन आपके लिए पूरी तरह से समर्पित रहेंगे और आप उनके साथ कहीं घूमने फिरने भी जा सकते हैं।
यह समय परिवार वालों के साथ आनंदित होकर किसी पिकनिक या टूर पर जाने में भी अनुकूलता देगा। आप की यात्राएं होंगी। ये यात्राएं सुदूर लंबी यात्राएं हो सकती हैं, जिनमें आपको धन खर्च भी करना पड़ेगा लेकिन इससे आपको सुख और आनंद की प्राप्ति होगी। शुक्र ग्रह के प्रभाव से आपके छोटे भाई बहनों को भी अच्छे फलों की प्राप्ति होगी और वे अपने दांपत्य जीवन में सुख उठाएंगे। यदि वे कोई बिज़नेस करते हैं तो उसमें भी तरक्की मिलेगी। आपको इस समय में अपने निजी प्रयासों से अत्यंत ही अच्छी सफलता मिलेगी लेकिन आपका स्वास्थ्य कुछ मामलों में बिगड़ सकता है और आप स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान हो सकते हैं, इसलिए विशेष रूप से आपको अपने शरीर पर ध्यान देना चाहिए।
️तपागच्छाचार्य आचार्य. श्री. जिनचन्द्रसूरीश्र्वरजी म सा के मुताबिक़ ज्योतिष शास्त्र में वैदिक ज्योतिष के अनुसार शुक्र ग्रह वृषभ एवं तुला राशि का स्वामी है और
- मीन राशि में उच्च भाव में तथा कन्या राशि में नीच भाव में रहता है।
- बुध व शनि इसके मित्र ग्रह हैं, जबकि सूर्य और चंद्रमा इसके शत्रु ग्रह माने जाते हैं।
- यह मनुष्य जीवन के दो अहम पहलुओं को दर्शाता है जिनमें एक प्रेम है, तो दूसरा धन है।
- शुक्र ग्रह भौतिक सुख-सुविधा और विलासिता का भी कारक होता है।
- इसके अलावा शुक्र का मनुष्य की भावनाओं पर भी नियंत्रण होता है।
- शुक्र के प्रभाव के कारण ही व्यक्ति स्वभाव से ख़र्चीला हो जाता है।
- शुक्र का मज़बूत होना संपन्नता की निशानी है।
- शुक्र की मज़बूती से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।
- शुक्र कला, सौंदर्यता, प्रेम, रोमांस, सहजता, मनोरंजन एवं धन का कारक माना जाता है.
- शुक्र को भौतिक सुख, प्रेम, विवाह, वासना और कला आदि का कारक ग्रह माना गया है।
- शुक्र का स्वरूप अति सुन्दर तथा मनमोहक है इसलिए शुक्र को सौन्दर्य का प्रतीक भी माना जाता है।
- यदि कुंडली में शुक्र कमज़ोर हो तो प्रेम, विवाह, विलासिता, सुख-समृद्धि, कला-संगीत आदि में अड़चन आती है।
- साथ ही नेत्र रोग, अपच, मुँहासे जैसी शारीरिक पीड़ा से गुज़रना पड़ता है, जबकि शुक्र के मज़बूत होने से शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

shukra ka gochar by
जिन शीशू अजित
_देवी स्वप्न द्वारा निर्मित_ ८४ जिनालय समलंकृत
सावत्थीतीर्थ धाम
_बावला, अहमदाबाद_
: 02714232612
आजीवन गुरुचरणसेवी
मुनी अजितचन्द्र विजय
Whatsapp 09824010332
