जन्म का पाया : कुंडली में कैसे देखा जाता है 

अक्सर हमारे घरों में जब बच्चे का जन्म होता है, तो हम यह जानना चाहते हैं कि जन्म का पाया कौन सा है। इसका बच्चे के भविष्य के साथ गहरा संबंध है। ज्योतिष शास्त्र में इसके ज्ञान को अति महत्वपूर्ण और सर्वप्रथम किया जाने वाला माना जाता है। प्राचीन समय में इसका ज्ञान घर के बड़े बुजुर्ग भी रखते थे। आज इस आलेख में उसी विधा की चर्चा की जा रही है। इसको सरल भाषा में समझ कर हम अपने पारिवारिक सदस्यों के पाये के सन्दर्भ में जानने का प्रयास करेंगे। इस संदर्भ में जैन समाज की जानी मानी एस्ट्रोलॉजर और गोल्ड मेडलिस्ट मीना जी नाहटा का यह लेख आप सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत है –

ऐसे देखा जाता है जन्म का पाया

बच्चे का जन्म होते ही बड़े-बुजुर्ग यह जानने को उत्सुक रहते हैं। बच्चा किस पाए के साथ घर में आया है। कुंडली के बारह स्थानों को चार पायों में बाँटा गया है. और इन्हें चार धातुओं-सोना, चाँदी, ताँबा और लोहे का नाम दिया गया है।
जन्म के समय चंद्रमा जिस स्थान पर होता है (कुंडली में) उसके अनुसार पाया जाना जाता है।
  1.  सोने का पाया : जब चंद्रमा पहले, छठे या ग्यारहवें में हो तो स्वर्ण पाद का जन्म समझा जाता है। श्रेष्ठता क्रम में यह तीसरे नंबर पर आता है।
  2. चाँदी का पाया : चंद्रमा दूसरे, पाँचवे या नव वें भाव में हो तो चाँदी के पाए का जन्म माना जाता है। श्रेष्ठता क्रम में यह सर्वोत्तम माना जाता है।
  3. ताँबे का पाया : चंद्रमा तीसरे, सातवें या दसवें स्थान में हो तो ताँबे का पाया होता है। श्रेष्ठता क्रम में यह दूसरे क्रम पर है।
  4. लोहे का पाया : जब चंद्रमा चौथे, आठवें या बारहवें भाव में हो तो बच्चे का जन्म लोहे के पाए का होता है। यह पाया शुभ नहीं माना जाता।
वास्तव में चंद्रमा 4, 8, 12 में स्वास्थ्य हानि करता है इसलिए कदाचित लोहे के पाए को अशुभ माना गया है |
जन्म का पाया
एस्ट्रो मीना नाहटा जैन
इंदौर
6260840529
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